पुत्रदा एकादशी 2025 – तारीख, पूजा विधि, व्रत कथा

पुत्रदा एकादशी — 2025

📅 तिथि: 4 अगस्त 2025 (सोमवार)

📜 तिथि विवरण: एकादशी

🌌 नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा

🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (श्रवण)

📆 सप्ताह/दिन: सोमवार

🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Aug 03
Ends – 08:15 PM, Aug 04

परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)

📅 परना तिथि: 2025-08-05

🌞 सूर्योदय: 06:00 AM

🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (शुक्ल)

पुत्रदा एकादशी

व्रत का महत्व

पुत्रदा एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।

पुत्रदा एकादशी की कथा

पुत्रदा एकादशी का व्रत हर साल कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

कथा

पुरातन काल में एक राजा थे, जिनका नाम था ‘धर्मसेन’। वे बहुत ही धर्मात्मा और परोपकारी थे, लेकिन उनके कोई संतान नहीं थी। इस कारण राजा और रानी बहुत दुखी रहते थे। एक दिन, राजा ने एक ऋषि को अपने दरबार में आमंत्रित किया और अपनी समस्या बताई। ऋषि ने उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

राजा ने अपने वचन के अनुसार एकादशी का व्रत किया। उन्होंने पूरे दिन उपवासी रहकर भगवान की आराधना की और रात में कीर्तन किया। इस दिन उन्होंने विशेष रूप से गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराया। व्रत के प्रभाव से अगले वर्ष रानी ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। राजा और रानी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।

महत्व और आध्यात्मिक लाभ

पुत्रदा एकादशी का व्रत केवल संतान प्राप्ति के लिए ही नहीं, बल्कि सभी प्रकार की इच्छाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है। इस दिन उपवास करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है। भक्तों को इस दिन भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन होकर ध्यान करना चाहिए। इसके साथ ही, गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने से पुण्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

इस प्रकार, पुत्रदा एकादशी का व्रत न केवल संतान सुख की प्राप्ति में सहायक है, बल्कि यह भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भी लाता है।

पुत्रदा एकादशी पूजा विधि

  • पूजा की तैयारी:
    – एकादशी के दिन प्रातः जल्दी उठें।
    – स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
    – पूजा स्थान को साफ करें और वहां एक चौकी पर पीले या सफेद वस्त्र बिछाएं।
  • आवश्यक सामग्री:
    – दीपक, अगरबत्ती, फूल, फल (केला, सेब),
    – तुलसी के पत्ते, चावल, दही,
    – गुड़, नारियल,
    – श्रीराम का चित्र या प्रतिमा।
  • दीप जलाना:
    – दीपक को जलाकर उसकी चारों दिशा की ओर घुमाएं और ‘ॐ दीप ज्योति नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • भगवान का स्मरण:
    – श्रीराम का स्मरण करते हुए ‘ॐ श्री रामाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
  • फलों और मिठाई का भोग:
    – भगवान को फल और मिठाई अर्पित करें।
    – गुड़ और दही का भोग भी लगाएं।
  • आरती:
    – आरती करते समय ‘ॐ जय जगदीश हरे’ का गायन करें।
  • प्रसाद वितरण:
    – पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें और सभी को प्रसाद ग्रहण कराएं।
  • उपवास का पालन:
    – एकादशी का उपवास रखें।
    – अगले दिन द्वादशी को सूर्योदय के बाद ‘पारणा’ करें।
    – फलाहार या दूध-चावल का सेवन कर सकते हैं।

यह पूजा विधि पुत्रदा एकादशी के महत्व को ध्यान में रखते हुए की गई है। श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर भगवान का आशीर्वाद अवश्य मिलेगा।

2025 की सभी एकादशियाँ

नाम तिथि पक्ष
पुत्रदा एकादशी 9 जनवरी 2025 (गुरुवार) शुक्ल
कात्यायनी एकादशी 25 जनवरी 2025 (शनिवार) कृष्ण
षट्तिला एकादशी 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार) शुक्ल
विजया एकादशी 23 फ़रवरी 2025 (रविवार) कृष्ण
आमलकी एकादशी 9 मार्च 2025 (रविवार) शुक्ल
पापमोचनी एकादशी 25 मार्च 2025 (मंगलवार) कृष्ण
कामदा एकादशी 8 अप्रैल 2025 (मंगलवार) शुक्ल
अपरा एकादशी 23 अप्रैल 2025 (बुधवार) कृष्ण
मोहिनी एकादशी 7 मई 2025 (बुधवार) शुक्ल
योगिनी एकादशी 23 मई 2025 (शुक्रवार) कृष्ण
निर्जला एकादशी 6 जून 2025 (शुक्रवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 21 जून 2025 (शनिवार) कृष्ण
देवशयनी एकादशी 6 जुलाई 2025 (रविवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 20 जुलाई 2025 (रविवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 4 अगस्त 2025 (सोमवार) शुक्ल
अजा एकादशी 18 अगस्त 2025 (सोमवार) कृष्ण
परिवर्तिनी एकादशी 3 सितंबर 2025 (बुधवार) शुक्ल
इन्दिरा एकादशी 17 सितंबर 2025 (बुधवार) कृष्ण
पापांकुशा एकादशी 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) शुक्ल
पसांकुशा एकादशी 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) कृष्ण
प्रबोधिनी एकादशी 1 नवंबर 2025 (शनिवार) शुक्ल
रमा एकादशी 15 नवंबर 2025 (शनिवार) कृष्ण
मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) शुक्ल
उत्पन्ना एकादशी 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) शुक्ल