परिवर्तिनी एकादशी — 2025
📅 तिथि: 3 सितंबर 2025 (बुधवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: श्रवण
🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (Bhadrapada)
📆 सप्ताह/दिन: बुधवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Sep 02
Ends – 08:15 PM, Sep 03
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2025-09-04
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (शुक्ल)

व्रत का महत्व
परिवर्तिनी एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी की कथा
परिवर्तिनी एकादशी, जिसे ‘आमलकी एकादशी’ भी कहा जाता है, का व्रत हर साल श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस वर्ष यह एकादशी 3 सितंबर 2025 को आएगी। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की विशेष पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं।
कथा
प्राचीन समय की बात है, एक राजा नामकृतेश ने अपने राज्य में एक महल बनवाने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने राजमहल में बहुत सारी वैभव और ऐश्वर्य का प्रदर्शन किया। परंतु, राजा की पत्नी बहुत दुखी थी क्योंकि राजा भगवान विष्णु की पूजा नहीं करते थे।
राजमहल में एक दिन देवी लक्ष्मी प्रकट हुईं और राजा को समझाया कि यदि वह भगवान विष्णु की पूजा नहीं करेंगे तो उनका राज्य और सुख-संसार समाप्त हो जाएगा। राजा ने देवी की बातों को ध्यान से सुना और उन्होंने परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने का निश्चय किया।
राजा ने इस दिन उपवास रखा और भगवान विष्णु की भक्ति में लीन हो गए। उन्होंने सभी भक्तों के साथ मिलकर भजन-कीर्तन किए। राजा की भक्ति देखकर भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्होंने राजा को सभी सुखों का आश्वासन दिया। इस प्रकार, राजा ने अपनी पत्नी को खुश किया और राज्य में सुख-समृद्धि का आगमन हुआ।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
परिवर्तिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। भक्तों को इस दिन उपवास रखना चाहिए और भगवान विष्णु के नाम का जाप करना चाहिए।
इस एकादशी का व्रत करने से मानसिक शांति मिलती है और भक्त की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ है जो अपने जीवन में किसी कठिनाई का सामना कर रहे हैं। इस व्रत से जीवन में सकारात्मकता और आंतरिक बल की वृद्धि होती है।
परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि
- पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
-
<li क्वाथ (गर्म पानी)
<li फल (सेब, केला, मौसमी आदि)
<li दूध और दही
<li गंगाजल या शुद्ध जल
<li दीपक और बत्ती
<li अगरबत्ती
<li पुष्प (फूल)
<li चंदन और कुमकुम
<li नैवेद्य (फल, मिठाई)
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- स्वच्छ स्थान पर पूजा स्थल तैयार करें।
- गंगाजल से स्थान को शुद्ध करें।
- दीपक जलाकर उसकी चारों दिशाओं में परिक्रमा करें।
- भगवान श्री विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- फूल और चंदन अर्पित करें।
- अगरबत्ती जलाएं और मंत्र का जाप करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”। - नैवेद्य अर्पित करें और भगवान से आशीर्वाद मांगें।
- एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को सूर्योदय से पहले या बाद में करें।
- पारण के समय केवल फल और दूध का सेवन करें।
- शुद्धता का ध्यान रखें और शांत मन से भोजन करें।
इस प्रकार, परिवर्तिनी एकादशी की पूजा विधि का पालन करें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।
2025 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
पुत्रदा एकादशी | 9 जनवरी 2025 (गुरुवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 25 जनवरी 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 23 फ़रवरी 2025 (रविवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 9 मार्च 2025 (रविवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 25 मार्च 2025 (मंगलवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 8 अप्रैल 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 23 अप्रैल 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 7 मई 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 23 मई 2025 (शुक्रवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 6 जून 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 21 जून 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 6 जुलाई 2025 (रविवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 20 जुलाई 2025 (रविवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 4 अगस्त 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 18 अगस्त 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 3 सितंबर 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
इन्दिरा एकादशी | 17 सितंबर 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 1 नवंबर 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 15 नवंबर 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |