आमलकी एकादशी — 2025
📅 तिथि: 9 मार्च 2025 (रविवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: आश्लेषा
🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (Phalguna)
📆 सप्ताह/दिन: रविवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Mar 08
Ends – 08:15 PM, Mar 09
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2025-03-10
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (शुक्ल)
व्रत का महत्व
आमलकी एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
आमलकी एकादशी की कथा
आमलकी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन आमला अर्थात् आंवला का पूजन किया जाता है। आमलकी एकादशी का व्रत रखने से भक्तों को मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति होती है।
कथा
पुराणों के अनुसार एक बार भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से आमलकी एकादशी के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि एक बार एक ब्राह्मण अपने परिवार के साथ बहुत दुखी था, क्योंकि उसके पास कोई संतान नहीं थी। उसने कई यज्ञ और तप किए, लेकिन कुछ भी सफल नहीं हुआ। अंत में, उसने आमलकी एकादशी का व्रत करने का निर्णय लिया।
ब्राह्मण ने इस दिन व्रत रखा, आमला वृक्ष की पूजा की और उसके फल का सेवन किया। उसकी भक्ति और श्रद्धा देखकर भगवान श्री कृष्ण प्रकट हुए और कहा कि तेरी भक्ति से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें संतान देने वाला हूँ। भगवान ने उसे एक पुत्र का वरदान दिया, और उसके बाद ब्राह्मण के जीवन में सुख-शांति का आगमन हुआ।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
आमलकी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी बहुत प्रभावी माना जाता है। इस दिन आमला का सेवन करने से शरीर की सभी बीमारियाँ दूर होती हैं और मन को शांति मिलती है।
इस व्रत के दौरान श्रद्धालु को एकादशी के दिन उपवास करना चाहिए और आमला का पूजन करना चाहिए। इस दिन किए गए जप और तप से व्यक्ति के पाप कटते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आमलकी एकादशी का व्रत न केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि और ईश्वर के निकटता का साधन भी है। इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से जीवन में सुख और समृद्धि का संचार होता है।
आमलकी एकादशी पूजा विधि
- पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
- आमलकी (आंवला) फल
- पुष्प (फूल)
- दीपक
- अगरबत्ती
- चंदन पेस्ट
- पानी और जल का कलश
- नैवेद्य (फल, मिठाई)
- सुपारी और सिक्के
- पूजा की विधि:
- सुबह जल्दी स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को स्वच्छ करें और आमलकी फल को रखें।
- दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।
- चंदन पेस्ट से आमलकी फल पर तिलक करें।
- फूलों से आमलकी की पूजा करें और उन्हें अर्पित करें।
- नैवेद्य अर्पित करें और भगवान से आशीर्वाद मांगें।
- मंत्र:
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ आमलकी वृक्षाय नमः
- पराण और नाश्ता:
- एकादशी व्रत के बाद द्वादशी को नाश्ते में फल और दूध का सेवन करें।
- द्वादशी तिथि को प्रातः स्नान कर फिर से आमलकी की पूजा करें और प्रसाद ग्रहण करें।
इस प्रकार आमलकी एकादशी की पूजा विधि सरलता से की जा सकती है। इस दिन उपवास रखने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
2025 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
पुत्रदा एकादशी | 9 जनवरी 2025 (गुरुवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 25 जनवरी 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 23 फ़रवरी 2025 (रविवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 9 मार्च 2025 (रविवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 25 मार्च 2025 (मंगलवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 8 अप्रैल 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 23 अप्रैल 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 7 मई 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 23 मई 2025 (शुक्रवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 6 जून 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 21 जून 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 6 जुलाई 2025 (रविवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 20 जुलाई 2025 (रविवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 4 अगस्त 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 18 अगस्त 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 3 सितंबर 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
इन्दिरा एकादशी | 17 सितंबर 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 1 नवंबर 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 15 नवंबर 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |