षट्तिला एकादशी 2026 – तारीख, पूजा विधि, व्रत कथा

षट्तिला एकादशी — 2026

📅 तिथि: 28 जनवरी 2026 (बुधवार)

📜 तिथि विवरण: एकादशी

🌌 नक्षत्र: आर्द्रा

🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (मघा)

📆 सप्ताह/दिन: बुधवार

🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Jan 27
Ends – 08:15 PM, Jan 28

परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)

📅 परना तिथि: 2026-01-29

🌞 सूर्योदय: 06:00 AM

🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (शुक्ल)

षट्तिला एकादशी

व्रत का महत्व

षट्तिला एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।

षट्तिला एकादशी व्रत कथा

षट्तिला एकादशी का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 28 जनवरी 2026 को पड़ेगा। इस दिन विशेष रूप से तिल का सेवन करना और तिल से संबंधित अनुष्ठान करना आवश्यक होता है। इस दिन तिल के तेल से स्नान करना और तिल के लड्डू बनाना धार्मिक महत्व रखता है।

कथा

एक समय की बात है, एक समृद्ध राजा अपने राज्य में धर्म और सत्य के प्रति बहुत सजग और धर्मात्मा था। एक दिन, राजा को यह पता चला कि उसकी प्रजा में अन्न की कमी हो गई है और लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। राजा ने सोचा कि यदि वह सच्चे मन से भगवान की आराधना करेगा, तो उसका राज्य समृद्ध होगा। उसने षट्तिला एकादशी का व्रत करने का निश्चय किया।

राजा ने इस दिन उपवास रखा और तिल के तेल से स्नान किया। उसने भगवान विष्णु की आराधना की और तिल का भोग अर्पित किया। राजा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे दर्शन दिए और कहा, “हे राजन! तुमने सच्चे मन से मेरा व्रत किया है, इसलिए तुम्हारे राज्य में जल्द ही अन्न की भरपूरता होगी।”

महत्व और आध्यात्मिक लाभ

षट्तिला एकादशी का व्रत केवल भौतिक समृद्धि के लिए ही नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि एवं मोक्ष की प्राप्ति के लिए भी किया जाता है। इस दिन व्रति को अपनी भावनाओं को शुद्ध करना चाहिए और भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए। इस व्रत से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

इस दिन तिल के सेवन से शरीर की ऊर्जा बढ़ती है और मानसिक शांति मिलती है। यह व्रत करने से व्यक्ति को प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसके सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। इस प्रकार, षट्तिला एकादशी का व्रत न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए, बल्कि आत्मा की शुद्धि के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

षट्तिला एकादशी पूजा विधि

  • **पूजा के लिए आवश्यक सामग्री**:
    • तिल (सेसामे बीज)
    • गंगाजल या सामान्य जल
    • फूल (गुलाब, कनेर आदि)
    • दीपक, अगरबत्ती
    • पत्तल, कलश
    • नैवेद्य (फल, मिठाई)
    • एकादशी की कथा (पुस्तक या लेख)
  • **स्नान और शुद्धता**:
    • सुबह जल्दी स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • **पूजा स्थान की तैयारी**:
    • पूजा स्थान को साफ करें और वहां तिल रखें।
    • कलश में जल भरकर रखें।
  • **पूजा की प्रक्रिया**:
    • दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।
    • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने तिल रखें।
    • फूल अर्पित करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
    • नैवेद्य अर्पित करें और “ॐ विष्णवे नमः” मंत्र बोलें।
  • **कथा सुनें**:
    • षट्तिला एकादशी की कथा ध्यानपूर्वक सुनें।
  • **पाराण (ब्रेकफास्ट)**:
    • एकादशी के उपवास के बाद, अगले दिन सुबह तिल के लड्डू या तिल से बने व्यंजन का सेवन करें।
    • पाराण के समय “ॐ नमो नारायणाय” का जाप करें।

इस प्रकार, श्रद्धा से इस पूजा को अदा करें और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें।

2026 की सभी एकादशियाँ

नाम तिथि पक्ष
सफल एकादशी 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) कृष्ण
सफल एकादशी 14 जनवरी 2026 (बुधवार) कृष्ण
षट्तिला एकादशी 28 जनवरी 2026 (बुधवार) शुक्ल
कात्यायनी एकादशी 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) कृष्ण
आमलकी एकादशी 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
विजया एकादशी 14 मार्च 2026 (शनिवार) कृष्ण
कामदा एकादशी 28 मार्च 2026 (शनिवार) शुक्ल
पापमोचनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) कृष्ण
मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) शुक्ल
अपरा एकादशी 12 मई 2026 (मंगलवार) कृष्ण
निर्जला एकादशी 26 मई 2026 (मंगलवार) शुक्ल
योगिनी एकादशी 11 जून 2026 (गुरुवार) कृष्ण
देवशयनी एकादशी 25 जून 2026 (गुरुवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
अजा एकादशी 8 अगस्त 2026 (शनिवार) कृष्ण
परिवर्तिनी एकादशी 23 अगस्त 2026 (रविवार) शुक्ल
परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) शुक्ल
पसांकुशा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) कृष्ण
पापांकुशा एकादशी 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) शुक्ल
रमा एकादशी 4 नवंबर 2026 (बुधवार) कृष्ण
प्रबोधिनी एकादशी 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 (रविवार) शुक्ल