विजया एकादशी 2026 – तारीख, पूजा विधि, व्रत कथा

विजया एकादशी — 2026

📅 तिथि: 14 मार्च 2026 (शनिवार)

📜 तिथि विवरण: एकादशी

🌌 नक्षत्र: धनिष्ठा

🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (Phalguna)

📆 सप्ताह/दिन: शनिवार

🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Mar 13
Ends – 08:15 PM, Mar 14

परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)

📅 परना तिथि: 2026-03-15

🌞 सूर्योदय: 06:00 AM

🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)

विजया एकादशी

व्रत का महत्व

विजया एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।

विजया एकादशी की कथा

विजया एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह एकादशी फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की होती है और इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन उपवास करने से भक्तों को सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में विजय प्राप्त होती है।

कथा

प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक ब्राह्मण अपने परिवार के साथ निवास करता था। वह ब्राह्मण बहुत धार्मिक और सत्यवादी था, लेकिन उसके पास धन की कमी थी। एक दिन, उसने सुन लिया कि विजया एकादशी का व्रत करने से सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं। उसने निश्चय किया कि वह इस एकादशी का व्रत करेगा।

व्रत के दिन उसने पूरे मन से भगवान श्री कृष्ण की पूजा की और उपवास किया। रात में उसने एक दिव्य स्वप्न देखा, जिसमें भगवान कृष्ण ने उसे दर्शन दिए और कहा, “तुम्हारे भक्ति भाव और व्रत के कारण तुम्हारी सभी समस्याएँ समाप्त होंगी।” जब वह जागा, तो उसके जीवन में बदलाव आने लगे। धीरे-धीरे उसे धन, सुख और समृद्धि प्राप्त हुई।

महत्व और आध्यात्मिक लाभ

विजया एकादशी का व्रत करने से भक्त को मानसिक शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इस दिन उपवास करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में विजय प्राप्त होती है। साथ ही, इस व्रत के माध्यम से श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपने प्रेम और भक्ति को प्रकट करते हैं।

इस प्रकार, विजया एकादशी का व्रत न केवल भौतिक सुखों की प्राप्ति करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग प्रशस्त करता है। इस दिन की विशेष पूजा से भक्तों को जीवन में आने वाले सभी संकटों से मुक्ति मिलती है।

विजया एकादशी पूजा विधि

  • पूजा की तैयारी:
    • सर्वप्रथम, एकादशी के दिन प्रात: उठकर स्नान करें।
    • पूजा स्थान को स्वच्छ करें एवं वहां एक चादर बिछाएं।
    • भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
  • आवश्यक सामग्री:
    • फूल, दीपक, अगरबत्ती, नैवेद्य (फल, मिठाई), पत्तल और जल का कलश।
    • विष्णु सहस्त्रनाम, तुलसी के पत्ते, चंदन, और कपूर।
  • पूजा का क्रम:
    • दीप जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें।
    • फूल अर्पित करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
    • नैवेद्य अर्पित करें और “ॐ विष्णवे नमः” का जाप करें।
    • तुलसी के पत्ते अर्पित करें और भगवान से क्षमा प्रार्थना करें।
    • अंत में, आरती करें और “जय विष्णु देव” का गान करें।
  • परणा (ब्रेकफास्ट) विधि:
    • एकादशी समाप्त होने के बाद, अगले दिन प्रात: सूर्योदय से पहले पारणा करें।
    • सादा भोजन या फल का सेवन करें।
    • भोजन के साथ “ॐ नमो नारायणाय” का जाप करें।

इस विधि से विजया एकादशी की पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

2026 की सभी एकादशियाँ

नाम तिथि पक्ष
सफल एकादशी 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) कृष्ण
सफल एकादशी 14 जनवरी 2026 (बुधवार) कृष्ण
षट्तिला एकादशी 28 जनवरी 2026 (बुधवार) शुक्ल
कात्यायनी एकादशी 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) कृष्ण
आमलकी एकादशी 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
विजया एकादशी 14 मार्च 2026 (शनिवार) कृष्ण
कामदा एकादशी 28 मार्च 2026 (शनिवार) शुक्ल
पापमोचनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) कृष्ण
मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) शुक्ल
अपरा एकादशी 12 मई 2026 (मंगलवार) कृष्ण
निर्जला एकादशी 26 मई 2026 (मंगलवार) शुक्ल
योगिनी एकादशी 11 जून 2026 (गुरुवार) कृष्ण
देवशयनी एकादशी 25 जून 2026 (गुरुवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
अजा एकादशी 8 अगस्त 2026 (शनिवार) कृष्ण
परिवर्तिनी एकादशी 23 अगस्त 2026 (रविवार) शुक्ल
परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) शुक्ल
पसांकुशा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) कृष्ण
पापांकुशा एकादशी 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) शुक्ल
रमा एकादशी 4 नवंबर 2026 (बुधवार) कृष्ण
प्रबोधिनी एकादशी 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 (रविवार) शुक्ल