पापांकुशा एकादशी — 2026
📅 तिथि: 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद
🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (Ashwin)
📆 सप्ताह/दिन: बुधवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Oct 20
Ends – 08:15 PM, Oct 21
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2026-10-22
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (शुक्ल)

व्रत का महत्व
पापांकुशा एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
पापांकुशा एकादशी की कथा
पापांकुशा एकादशी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की आराधना की जाती है। इस एकादशी का नाम ‘पापांकुशा’ इसलिये पड़ा क्योंकि यह पापों को काटने वाली है। इस दिन व्रति को उपवास करना चाहिए और भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करना चाहिए।
कथा
एक समय की बात है, एक राजा था जिसका नाम ‘सत्यव्रत’ था। वह अत्यंत धर्मात्मा और सत्य का पालन करने वाला था। परंतु, एक बार उसने अपने राज्य में एक ब्राह्मण को अपमानित किया। इस अपमान के कारण राजा को बहुत पछतावा हुआ और उसने ब्राह्मण से क्षमा मांगने का निर्णय लिया।
राजा ने ब्राह्मण को प्रसन्न करने के लिए पापांकुशा एकादशी का व्रत रखा। इस दिन उसने दिनभर उपवास किया और भगवान श्री कृष्ण की पूजा की। भगवान की कृपा से राजा को अपने पापों का प्राश्चित करने का अवसर मिला और उसने अपने राज्य में शांति और समृद्धि का अनुभव किया।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पाप कट जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की भक्ति करने से मन की शांति और आत्मिक संतोष मिलता है। यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो अपने जीवन में कोई कठिनाई या विघ्न का सामना कर रहे हैं।
इस एकादशी का व्रत करने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से व्रत करता है, उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। इस प्रकार पापांकुशा एकादशी का व्रत एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक साधना है।
पापांकुशा एकादशी पूजा विधि
- पूजा की तैयारी:
– एकादशी के दिन सुबह जल्दी स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
– पूजा स्थल को स्वच्छ करें और वहां एक आसन बिछाएं। - पूजा सामग्री:
– तुलसी के पत्ते
– फल (जैसे कि केला, सेब आदि)
– मिठाई (जैसे कि लड्डू या बर्फी)
– दीपक और घी
– अगरबत्ती
– चंदन
– पानी का कलश - पूजा का क्रम:
– पहले भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें।
– जल का अभिषेक करें और भगवान को स्नान कराएं।
– चंदन और फूल अर्पित करें।
– दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।
– तुलसी के पत्ते अर्पित करें। - मंत्रों का उच्चारण:
– “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” (3 बार)
– “ॐ विष्णवे नमः” (5 बार)
– “ॐ नमो नारायणाय” (3 बार) - प्रसाद वितरण:
– पूजा के बाद फल और मिठाई का प्रसाद बांटें।
– भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करें। - पारण विधि:
– एकादशी व्रत के बाद, द्वादशी को सुबह जल्दी फल एवं दूध का सेवन करें।
– इसके बाद सामान्य आहार प्रारंभ करें।
यह विधि श्रद्धा और भक्ति से करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
2026 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
सफल एकादशी | 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
सफल एकादशी | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 28 जनवरी 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 14 मार्च 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 28 मार्च 2026 (शनिवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 12 मई 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 26 मई 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 11 जून 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 25 जून 2026 (गुरुवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 8 अगस्त 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 23 अगस्त 2026 (रविवार) | शुक्ल |
परिवर्तिनी एकादशी | 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 4 नवंबर 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 20 दिसंबर 2026 (रविवार) | शुक्ल |