उत्पन्ना एकादशी — 2026
📅 तिथि: 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: विशाखा
🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (Margashirsha)
📆 सप्ताह/दिन: शुक्रवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Dec 03
Ends – 08:15 PM, Dec 04
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2026-12-05
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)

व्रत का महत्व
उत्पन्ना एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
उत्पन्ना एकादशी की कथा
उत्पन्ना एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में आती है, जो इस वर्ष 4 दिसंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन भक्तजन विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। इस दिन का महत्व इस बात से जुड़ा है कि इस दिन भगवान विष्णु ने भगवान वामन के रूप में अवतार लिया था।
कथा का सारांश
प्राचीन काल में एक राजा थे, जिनका नाम ‘मयूर’ था। राजा मयूर बहुत ही धर्मात्मा और दानी थे। एक बार राजा ने एक साधु से सुना कि एकादशी व्रत करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं। राजा ने तय किया कि वह उत्पन्ना एकादशी का व्रत करेंगे। उन्होंने इस दिन उपवास रखा और भगवान विष्णु की पूजा की। राजा की श्रद्धा और भक्ति देख कर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें वरदान दिया कि जो भी इस दिन व्रत करेगा, वह सभी पापों से मुक्त होगा।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
उत्पन्ना एकादशी का व्रत करने से भक्तों को अनेक आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। इस दिन उपवास करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है। इसके अलावा, यह व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मकता लाने में मदद करता है। जो भक्त इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करते हैं, उन्हें सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन में संतुलन और शांति लाने का भी एक साधन है। इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाना चाहिए।
उत्पन्ना एकादशी पूजा विधि
- पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
- दीपक और तेल
- फूल (कमल, गेंदा)
- धूप और अगरबत्ती
- फल (सेब, केला, संतरा)
- नैवेद्य (सेंधा नमक से बनी खिचड़ी, फल)
- पानी और चावल
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- दीपक जलाएं और भगवान श्री कृष्ण का चित्र स्थापित करें।
- फूलों से भगवान की आरती करें।
- धूप और अगरबत्ती जलाएं।
- नैवेद्य अर्पित करें और इस मंत्र का उच्चारण करें:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
- भगवान की आरती करें और भक्तिभाव से भजन गाएं।
- पूजा के बाद फल और प्रसाद बांटें।
- दूसरे दिन (द्वादशी) को उपवास का पारण करें। सुबह में जल्दी उठकर हल्का नाश्ता करें, जैसे फल या दूध।
उत्पन्ना एकादशी का व्रत श्रद्धा और भक्ति से करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन उपवास रखना और भगवान का ध्यान करना महत्वपूर्ण है।
2026 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
सफल एकादशी | 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
सफल एकादशी | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 28 जनवरी 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 14 मार्च 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 28 मार्च 2026 (शनिवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 12 मई 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 26 मई 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 11 जून 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 25 जून 2026 (गुरुवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 8 अगस्त 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 23 अगस्त 2026 (रविवार) | शुक्ल |
परिवर्तिनी एकादशी | 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 4 नवंबर 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 20 दिसंबर 2026 (रविवार) | शुक्ल |