गुरुवार का महत्व
सनातन धर्म में, गुरुवार का दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा की जाती है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की अराधना करते हैं और गुरुवार व्रत (गुरुवार व्रत) को श्रद्धापूर्वक अनुसरण करते हैं।
यह व्रत विवाहित और अविवाहित महिलाओं के बीच विशेष लोकप्रिय है। विवाहित महिलाएं इस व्रत को एक जीवन भर सुख, समृद्धि और शांति से भरा जीवन बनाने के लिए रखती हैं, जबकि नयी शादीशुदा महिलाएं इसे उनके वंश को नवजात शिशु की कृपा पाने के लिए अनुसरण करती हैं।
ज्योतिष के अनुसार, गुरुवार व्रत रखने से कुंडली में गुरु (बृहस्पति) को मजबूती मिलती है। मजबूत गुरु करियर में सफलता, व्यापारिक समृद्धि, ज्ञान और आध्यात्मिक विकास लाता है।
गुरुवार के व्रत के पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए, भक्तों को पूजा के दौरान गुरुवार व्रत कथा को पढ़ने या सुनने की सलाह दी जाती है।
गुरुवार (बृहस्पतिवार) व्रत कथा
भारतवर्ष में एक प्रतापी और दानी राजा राज्य करता था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्मणों की सहायता करता था। उसकी रानी को यह बात अच्छी नहीं लगती थी, वह न गरीबों को दान देती, न भगवान का पूजन करती थी और न राजा को दान देने से मना करती थी।
एक दिन राजा शिकार खेलने वन को गए हुए थे, तो रानी महल में अकेली थी। उसी समय बृहस्पतिदेव साधु वेष में राजा के महल में भिक्षा के लिए गए और भिक्षा माँगी रानी ने भिक्षा देने से इन्कार किया। इसके परिणामस्वरूप एक उलटी स्थिति उत्पन्न हो गई।
इस कथा से हमें यह सिखने को मिलता है कि भगवान की पूजा और दान करना हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है।