षट्तिला एकादशी — 2025
📅 तिथि: 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: पुनर्वसु
🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (मघा)
📆 सप्ताह/दिन: शनिवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Feb 07
Ends – 08:15 PM, Feb 08
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2025-02-09
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (शुक्ल)
व्रत का महत्व
षट्तिला एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
षट्तिला एकादशी का महत्व
षट्तिला एकादशी भारतीय पंचांग के अनुसार, माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है। यह दिन भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। इस दिन विशेष रूप से तिल का सेवन किया जाता है। तिल को भारतीय संस्कृति में शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस एकादशी का व्रत रखने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और सभी पापों का क्षय होता है।
षट्तिला एकादशी की कथा
प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ निवास करता था। वह ब्राह्मण बहुत ही धार्मिक और सत्यवादी था, लेकिन उसकी पत्नी किसी कारणवश दुखी रहती थी। एक दिन ब्राह्मण ने एक साधू से सुना कि यदि कोई व्यक्ति षट्तिला एकादशी का व्रत करे, तो उसकी सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।
ब्राह्मण ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर इस व्रत को करने का निश्चय किया। उन्होंने इस दिन तिल के बने हुए भोजन का सेवन किया और पूरे मन से भगवान की पूजा की। इस व्रत के प्रभाव से उनकी पत्नी के सभी दुख दूर हो गए और घर में सुख-समृद्धि छा गई।
आध्यात्मिक लाभ
षट्तिला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। जो लोग इस दिन उपवास रखते हैं, उनकी आयु और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। इसके अलावा, यह व्रत पापों का नाश करता है और आत्मा को शुद्ध करता है।
इस प्रकार, षट्तिला एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भक्तों को इस दिन विशेष ध्यान और श्रद्धा के साथ भगवान की आराधना करनी चाहिए।
षट्तिला एकादशी पूजा विधि
- **पूजा के लिए आवश्यक सामग्री**:
- तिल (सेसमे के बीज)
- गंगाजल या पवित्र जल
- फूल (कमल या अन्य शुभ फूल)
- धूप और दीपक
- नैवेद्य (फल, मिठाई, और तिल के लड्डू)
- पुष्प माला
- चावल और बेसन
- एक थाली और एक मिट्टी का बर्तन
- **सर्वप्रथम स्नान करें**: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- **पुजास्थल तैयार करें**: एक साफ जगह पर भगवान विष्णु या भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- **तिल का उपयोग**: पूजा के दौरान तिल को पानी में भिगोकर भगवान को अर्पित करें।
- **धूप-दीप जलाएं**: भगवान को दीपक और धूप अर्पित करें।
- **मंत्र का जाप करें**: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ श्री कृष्णाय नम:” का जाप करें।
- **नैवेद्य अर्पित करें**: भगवान को फल, मिठाई और तिल के लड्डू का नैवेद्य अर्पित करें।
- **आरती करें**: आरती करें और भजन गाएं।
- **प्रसाद वितरण**: पूजा के बाद भगवान का प्रसाद सभी भक्तों में बांटें।
- **पारण विधि**: एकादशी के दिन उपवास के बाद, द्वादशी को सुबह सूर्योदय के बाद तिल का प्रसाद और फल का सेवन करें।
यह विधि श्रद्धा और भक्ति से करें। भगवान आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें।
2025 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
पुत्रदा एकादशी | 9 जनवरी 2025 (गुरुवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 25 जनवरी 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 23 फ़रवरी 2025 (रविवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 9 मार्च 2025 (रविवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 25 मार्च 2025 (मंगलवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 8 अप्रैल 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 23 अप्रैल 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 7 मई 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 23 मई 2025 (शुक्रवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 6 जून 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 21 जून 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 6 जुलाई 2025 (रविवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 20 जुलाई 2025 (रविवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 4 अगस्त 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 18 अगस्त 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 3 सितंबर 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
इन्दिरा एकादशी | 17 सितंबर 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 1 नवंबर 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 15 नवंबर 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |