अजा एकादशी — 2025
📅 तिथि: 18 अगस्त 2025 (सोमवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: पुनर्वसु
🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (श्रवण)
📆 सप्ताह/दिन: सोमवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Aug 17
Ends – 08:15 PM, Aug 18
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2025-08-19
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)

व्रत का महत्व
अजा एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
अजा एकादशी की कथा
अजा एकादशी का व्रत हिंदी पंचांग के अनुसार हर साल श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस वर्ष, यह व्रत 18 अगस्त, 2025 को आएगा। यह एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। एकादशी का व्रत रखने से भक्तों को अनेक लाभ मिलते हैं और यह पापों से मुक्ति का भी एक साधन है।
कथा का सार
अजा एकादशी की कथा के अनुसार, एक समय की बात है, एक राजा को अपने राज्य में एक अद्भुत ज्योति का दर्शन हुआ। राजा ने उस ज्योति के पीछे जाकर देखा तो वहां एक साधु बैठे हुए थे। साधु ने राजा को बताया कि यह ज्योति भगवान विष्णु की है। राजा ने साधु से पूछा कि वह किस प्रकार इस ज्योति की कृपा प्राप्त कर सकता है। साधु ने उत्तर दिया कि यदि वह अजा एकादशी का व्रत करेगा तो वह भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकता है।
राजा ने साधु की बात मानकर अजा एकादशी का व्रत किया। व्रत के दिन उसने केवल फल और जल का सेवन किया। इस उपासना से राजा को परम शांति और सुख की प्राप्ति हुई। इस प्रकार, राजा ने अपने राज्य का कल्याण किया और भगवान विष्णु की कृपा से सुखी जीवन व्यतीत किया।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
अजा एकादशी का व्रत रखने से भक्तों को अनेक आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। यह व्रत पापों का नाश करता है और मन की शांति प्रदान करता है। जो लोग इस दिन श्रद्धा भाव से उपवास रखते हैं, उन्हें भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और सभी प्रकार की कठिनाइयाँ दूर होती हैं।
इस प्रकार, अजा एकादशी का व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और मानसिक संतुलन का साधन भी है।
अजा एकादशी पूजा विधि
- पूजा के लिए सामग्री:
- दीपक
- अगरबत्ती
- फूल (कमल या अन्य)
- नैवेद्य (फल, खीर या साबूदाना)
- पानी या जल कलश
- चंदन या कुमकुम
- रुद्राक्ष या तुलसी के पत्ते
- स्नान और शुद्धता:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पुजास्थल की सजावट:
- पूजा स्थान को साफ करें और आभायुक्त करें।
- दीप जलाना:
- दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
- भगवान का स्मरण:
- भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
- नैवेद्य अर्पित करें:
- फल या खीर को भगवान को अर्पित करें।
- आरती:
- आरती करें और “जय श्री कृष्ण” का जयकारा लगाएं।
- पारण का समय:
- एकादशी व्रत के दिन रात के बाद द्वादशी तिथि को फलाहार का सेवन करें।
- साबूदाना खिचड़ी, फल, या अन्य हल्का भोजन कर सकते हैं।
सभी भक्तों से निवेदन है कि इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करें।
2025 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
पुत्रदा एकादशी | 9 जनवरी 2025 (गुरुवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 25 जनवरी 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 23 फ़रवरी 2025 (रविवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 9 मार्च 2025 (रविवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 25 मार्च 2025 (मंगलवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 8 अप्रैल 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 23 अप्रैल 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 7 मई 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 23 मई 2025 (शुक्रवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 6 जून 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 21 जून 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 6 जुलाई 2025 (रविवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 20 जुलाई 2025 (रविवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 4 अगस्त 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 18 अगस्त 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 3 सितंबर 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
इन्दिरा एकादशी | 17 सितंबर 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 1 नवंबर 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 15 नवंबर 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |