पापमोचनी एकादशी — 2025
📅 तिथि: 25 मार्च 2025 (मंगलवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: शतभिषा
🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (Chaitra)
📆 सप्ताह/दिन: मंगलवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Mar 24
Ends – 08:15 PM, Mar 25
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2025-03-26
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)
व्रत का महत्व
पापमोचनी एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
पापमोचनी एकादशी की कथा
पापमोचनी एकादशी का व्रत हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से भक्तों के सभी पाप मिट जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कथा
प्राचीन समय की बात है, जब एक राजा नामक ‘धर्मपाल’ अपने राज्य के लिए बहुत परिश्रमी और न्यायप्रिय थे। परंतु, एक दिन उन्होंने एक साधु को अपने दरबार में देखा। साधु ने राजा को बताया कि उनके राज्य के लोग पापों में डूबे हुए हैं और उन्हें मुक्ति पाने के लिए पापमोचनी एकादशी का व्रत करना होगा। राजा ने साधु की बात को ध्यान से सुना और सभी प्रजा को एकादशी के व्रत के लिए प्रेरित किया।
राजा और प्रजा ने मिलकर एकादशी का व्रत किया और उस दिन भगवान विष्णु की पूजा की। व्रत समाप्ति के बाद, सभी ने अनुभव किया कि उनके पाप मिट गए हैं और उनके जीवन में सुख-शांति का आगमन हुआ। राजा ने साधु का आभार व्यक्त किया और व्रत को हर वर्ष मनाने का संकल्प लिया।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त होते हैं और उसे मानसिक शांति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं और वह आत्मिक रूप से मजबूत बनता है।
इस प्रकार, पापमोचनी एकादशी का व्रत न केवल पापों से मुक्त करने वाला है, बल्कि यह भक्तों के लिए जीवन में सुख और शांति लाने वाला भी है।
पापमोचनी एकादशी पूजा विधि
- पूजा सामग्री:
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और पानी)
- फूल (गुलाब, कनेर)
- दीपक और बत्ती
- नैवेद्य (फल, सूखे मेवे)
- कुंकुम, चंदन, और अक्षत
- गंगाजल या पवित्र जल
- पूजा की प्रक्रिया:
- स्नान कर के स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल को साफ करें और वहां एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- चौकी पर कुशा बिछाएं और उस पर भगवान का चित्र रखें।
- पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें।
- फूल अर्पित करें और दीपक जलाएं।
- नैवेद्य अर्पित करें और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
- भगवान के समक्ष प्रार्थना करें कि वह आपके पापों को मोचन करें।
- आरती करें और “ॐ जय श्री कृष्ण” का जाप करें।
- पराण विधि:
- एकादशी का व्रत समाप्त करने के लिए द्वादशी को सूर्योदय के बाद फल या सूखे मेवे का सेवन करें।
- इसके बाद हल्का भोजन करें, जिसमें दाल, चावल और सब्जियां शामिल हो सकती हैं।
इस प्रकार, आप पापमोचनी एकादशी का व्रत और पूजा विधि को सरलता से कर सकते हैं। भगवान विष्णु की कृपा से आपके सभी पापों का नाश होगा।
2025 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
पुत्रदा एकादशी | 9 जनवरी 2025 (गुरुवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 25 जनवरी 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 23 फ़रवरी 2025 (रविवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 9 मार्च 2025 (रविवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 25 मार्च 2025 (मंगलवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 8 अप्रैल 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 23 अप्रैल 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 7 मई 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 23 मई 2025 (शुक्रवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 6 जून 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 21 जून 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 6 जुलाई 2025 (रविवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 20 जुलाई 2025 (रविवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 4 अगस्त 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 18 अगस्त 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 3 सितंबर 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
इन्दिरा एकादशी | 17 सितंबर 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 1 नवंबर 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 15 नवंबर 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |