पापांकुशा एकादशी — 2025
📅 तिथि: 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद
🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (Ashwin)
📆 सप्ताह/दिन: शुक्रवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Oct 02
Ends – 08:15 PM, Oct 03
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2025-10-04
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: त्रयोदशी (शुक्ल)

व्रत का महत्व
पापांकुशा एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
पापांकुशा एकादशी की कथा
पापांकुशा एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना की जाती है और भक्तजन उपवास रखते हैं। इस एकादशी का नाम ‘पापांकुशा’ इसलिए पड़ा क्योंकि यह पापों को दूर करने वाले और पुण्य प्रदान करने वाले भगवान विष्णु के प्रति भक्ति का प्रतीक है।
कथा
प्राचीन समय की बात है, एक संत ने भगवान विष्णु की कृपा से एकाग्रता और भक्ति से अपने जीवन के सभी पापों को समाप्त कर दिया था। संत ने एक बार कहा कि जब लोग पाप करते हैं, तो उन्हें उसके परिणाम भोगने पड़ते हैं। इसी दौरान एक राजा ने संत से पूछा कि क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे पापों का नाश किया जा सके। संत ने राजा को पापांकुशा एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया।
राजा ने उस दिन उपवास रखा और रात में भगवान विष्णु की भक्ति में लीन हो गया। उसके मन में भगवान का ध्यान करते हुए उसका समस्त दुख और पाप समाप्त हो गए। इस प्रकार राजा ने न केवल अपने पापों का नाश किया, बल्कि भक्ति में लीन होकर मोक्ष भी प्राप्त किया।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से भक्त के सभी पाप क्षीण हो जाते हैं और उसे भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद मिलता है। इस दिन उपवास करने से मन की शांति, समर्पण और भक्ति में वृद्धि होती है। भक्तजन इस दिन हरि नाम का जाप करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस व्रत को करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार, पापांकुशा एकादशी का व्रत न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी अग्रसर करता है।
पापांकुशा एकादशी पूजन विधि
पापांकुशा एकादशी का व्रत हर वर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष होता है। इस दिन उपवास करने से पापों का नाश होता है। यहाँ पर पूजन विधि प्रस्तुत की जा रही है:
- पूजन सामग्रियाँ:
- गंगाजल या शुद्ध जल
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- फूल (विशेषकर तुलसी)
- दीपक और बाती
- अगरबत्ती
- फल (जैसे केला, सेब)
- नैवेद्य (स्वीट, चावल)
- पूजन विधि:
- सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थान को स्वच्छ करें और वहां भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- गंगाजल छिड़ककर स्थान का शुद्धिकरण करें।
- दीपक जलाएं और भगवान को अगरबत्ती अर्पित करें।
- पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें।
- फूलों से सजावट करें और नैवेद्य अर्पित करें।
- भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें।
- पूजन के अंत में, सभी भक्तों के बीच प्रसाद बांटें।
- पराण विधि:
- एकादशी का उपवास करने के बाद, द्वादशी के दिन सुबह स्नान करें।
- सूर्योदय के समय फल का सेवन करें, फिर हलका भोजन करें।
- व्यवस्थित रूप से भोजन करें और भगवान का धन्यवाद करें।
इस प्रकार से पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
2025 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
पुत्रदा एकादशी | 9 जनवरी 2025 (गुरुवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 25 जनवरी 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 23 फ़रवरी 2025 (रविवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 9 मार्च 2025 (रविवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 25 मार्च 2025 (मंगलवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 8 अप्रैल 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 23 अप्रैल 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 7 मई 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 23 मई 2025 (शुक्रवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 6 जून 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 21 जून 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 6 जुलाई 2025 (रविवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 20 जुलाई 2025 (रविवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 4 अगस्त 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 18 अगस्त 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 3 सितंबर 2025 (बुधवार) | शुक्ल |
इन्दिरा एकादशी | 17 सितंबर 2025 (बुधवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 1 नवंबर 2025 (शनिवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 15 नवंबर 2025 (शनिवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) | शुक्ल |