विजया एकादशी 2025 – तारीख, पूजा विधि, व्रत कथा

विजया एकादशी — 2025

📅 तिथि: 23 फ़रवरी 2025 (रविवार)

📜 तिथि विवरण: एकादशी

🌌 नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा

🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (Phalguna)

📆 सप्ताह/दिन: रविवार

🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Feb 22
Ends – 08:15 PM, Feb 23

परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)

📅 परना तिथि: 2025-02-24

🌞 सूर्योदय: 06:00 AM

🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)

व्रत का महत्व

विजया एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।

विजया एकादशी की कथा

विजया एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण की उपासना की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से मनुष्य को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और वह विजय प्राप्त करता है।

कथा का संक्षिप्त वर्णन

एक समय की बात है, एक राजा ने एक युद्ध में अपने शत्रुओं को हराने के लिए विजया एकादशी का व्रत रखा। राजा ने अपने सभी मंत्रियों और सैनिकों को भी इस व्रत का पालन करने के लिए प्रेरित किया। राजा ने दिनभर उपवास रखा और भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में लीन रहे। उन्होंने संध्या समय भगवान को विशेष भोग अर्पित किया और प्रार्थना की कि वह उन्हें युद्ध में विजय प्रदान करें।

राजा की सच्ची भक्ति और व्रत के फलस्वरूप भगवान श्री कृष्ण ने उनकी मनोकामना पूर्ण की। युद्ध में राजा ने अपने शत्रुओं को पराजित किया और विजय प्राप्त की। इस प्रकार, विजया एकादशी का व्रत न केवल राजा के लिए बल्कि उसके समस्त प्रजाजनों के लिए भी कल्याणकारी सिद्ध हुआ।

महत्व और आध्यात्मिक लाभ

विजया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। यह व्रत व्यक्ति के जीवन से दुख-दर्द और पापों को समाप्त करता है। साथ ही, यह व्रत करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस दिन सच्चे मन से भगवान की आराधना करने वाले भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस प्रकार, विजया एकादशी का व्रत करना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारी भावनाओं और मानसिकता को भी सकारात्मक दिशा देता है।

विजया एकादशी पूजा विधि

  • पूजा की तैयारी:
    – घर को स्वच्छ करें और पूजा स्थान को सजाएं।
    – पूजा के लिए आवश्यक सामग्री तैयार करें:
    – दीपक
    – अगरबत्ती
    – फूल
    – फल (केला, सेब, नारंगी)
    – मिठाई (लड्डू या बर्फी)
    – एक थाली
    – तुलसी का पत्ता
    – गंगाजल या शुद्ध जल।
  • पूजा का समय:
    – प्रात:काल सूर्योदय से पहले पूजा करें।
    – स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • दीप जलाना:
    – दीपक को तेल या घी से भरकर जलाएं।
    – अगरबत्ती लगाएं और भगवान का ध्यान करें।
  • भगवान का आह्वान:
    – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
    – भगवान श्री कृष्ण या विष्णु की प्रतिमा के समक्ष बैठें।
  • अर्पण:
    – फूल, फल और मिठाई भगवान को अर्पित करें।
    – तुलसी के पत्ते को भी अर्पित करें।
  • आरती:
    – आरती करें और “ॐ जय श्री कृष्णा” का उच्चारण करें।
    – आरती के बाद सबको प्रसाद वितरित करें।
  • पराण:
    – एकादशी व्रत के बाद द्वादशी को नाश्ते में हल्का भोजन करें।
    – फल-फूल और दूध से बनी चीजें खाने का प्रयास करें।
    – सभी को प्रसाद दें और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।

इस प्रकार विजया एकादशी की पूजा करके आप भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

2025 की सभी एकादशियाँ

नाम तिथि पक्ष
पुत्रदा एकादशी 9 जनवरी 2025 (गुरुवार) शुक्ल
कात्यायनी एकादशी 25 जनवरी 2025 (शनिवार) कृष्ण
षट्तिला एकादशी 8 फ़रवरी 2025 (शनिवार) शुक्ल
विजया एकादशी 23 फ़रवरी 2025 (रविवार) कृष्ण
आमलकी एकादशी 9 मार्च 2025 (रविवार) शुक्ल
पापमोचनी एकादशी 25 मार्च 2025 (मंगलवार) कृष्ण
कामदा एकादशी 8 अप्रैल 2025 (मंगलवार) शुक्ल
अपरा एकादशी 23 अप्रैल 2025 (बुधवार) कृष्ण
मोहिनी एकादशी 7 मई 2025 (बुधवार) शुक्ल
योगिनी एकादशी 23 मई 2025 (शुक्रवार) कृष्ण
निर्जला एकादशी 6 जून 2025 (शुक्रवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 21 जून 2025 (शनिवार) कृष्ण
देवशयनी एकादशी 6 जुलाई 2025 (रविवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 20 जुलाई 2025 (रविवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 4 अगस्त 2025 (सोमवार) शुक्ल
अजा एकादशी 18 अगस्त 2025 (सोमवार) कृष्ण
परिवर्तिनी एकादशी 3 सितंबर 2025 (बुधवार) शुक्ल
इन्दिरा एकादशी 17 सितंबर 2025 (बुधवार) कृष्ण
पापांकुशा एकादशी 3 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) शुक्ल
पसांकुशा एकादशी 16 अक्टूबर 2025 (गुरुवार) कृष्ण
प्रबोधिनी एकादशी 1 नवंबर 2025 (शनिवार) शुक्ल
रमा एकादशी 15 नवंबर 2025 (शनिवार) कृष्ण
मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर 2025 (सोमवार) शुक्ल
उत्पन्ना एकादशी 15 दिसंबर 2025 (सोमवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 30 दिसंबर 2025 (मंगलवार) शुक्ल