कात्यायनी एकादशी — 2026
📅 तिथि: 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: पूर्वाषाढ़ा
🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (मघा)
📆 सप्ताह/दिन: गुरुवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Feb 11
Ends – 08:15 PM, Feb 12
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2026-02-13
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)

व्रत का महत्व
कात्यायनी एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
कात्यायनी एकादशी की कथा
कात्यायनी एकादशी का व्रत हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह दिन माता कात्यायनी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। कात्यायनी देवी, दुर्गा का एक रूप हैं, जिन्हें विशेष रूप से भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली देवी माना जाता है।
कथा का सार
प्राचीन काल में एक राजा हुआ करते थे जिनका नाम कात्यायन था। राजा और रानी के पास एक संतान नहीं थी। उन्होंने कई ऋषियों-मुनियों से आशीर्वाद मांगा, लेकिन उन्हें संतान सुख नहीं मिला। एक दिन, राजा ने कात्यायनी देवी की आराधना करने का निर्णय लिया। उन्होंने व्रत रखा और सच्चे मन से देवी की पूजा की।
कई दिनों तक तप करने के बाद, देवी कात्यायनी प्रकट हुईं और राजा से कहा, “तुम्हारी भक्ति से प्रसन्न होकर मैं तुम्हें एक पुत्री दूंगी।” राजा की भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें एक सुंदर कन्या का वरदान दिया। उस कन्या का नाम ‘कात्यायनी’ रखा गया।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
कात्यायनी एकादशी का व्रत करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस दिन उपवास रखने से मन को शांति मिलती है और भक्ति का अनुभव होता है। भक्तों को चाहिए कि वे इस दिन माता कात्यायनी की विशेष पूजा करें, उन्हें फल-फूल अर्पित करें और भक्ति भाव से उनका स्मरण करें।
इस व्रत के माध्यम से भक्तों को मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मकता का अनुभव होता है। इस दिन देवी की कृपा से जीवन में खुशियों का संचार होता है।
कात्यायनी एकादशी पूजा विधि
- पूजा का समय: एकादशी तिथि के दिन सूर्योदय से पूर्व पूजा करें।
- आवश्यक सामग्री:
- घी का दीपक
- फूल (कमल, गुलाब)
- फल (केला, सेब)
- पंचामृत (दही, दूध, घी, शहद, चीनी)
- कात्यायनी देवी की तस्वीर या प्रतिमा
- नैवेद्य (खिचड़ी या कोई शुद्ध शाकाहारी व्यंजन)
- कलश में जल
- स्नान और शुद्धि: सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
- आसन और मंडल: पूजा स्थल पर एक आसन बिछाएं और उस पर देवी की तस्वीर रखें।
- दीप जलाना: घी का दीपक जलाएं और चारों ओर रखें।
- फूल अर्पित करना: देवी को फूल अर्पित करें।
- मंत्र उच्चारण:
- ॐ देवी कात्यायन्यै नमः
- ॐ ह्लीं कात्यायन्यै नमः
इन मंत्रों का जाप 11 बार करें।
- नैवेद्य अर्पित करना: तैयार किए गए नैवेद्य को देवी को अर्पित करें।
- आरती: आरती करें और भक्तिपूर्वक देवी की स्तुति करें।
- प्रसाद वितरण: पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें।
- पराण: एकादशी तिथि के अगले दिन सुबह उपवास का पारण करें। पारण के लिए फल और शुद्ध शाकाहारी भोजन लें।
इस प्रकार कात्यायनी एकादशी की पूजा करके श्रद्धालु देवी कात्यायनी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
2026 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
सफल एकादशी | 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
सफल एकादशी | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 28 जनवरी 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 14 मार्च 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 28 मार्च 2026 (शनिवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 12 मई 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 26 मई 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 11 जून 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 25 जून 2026 (गुरुवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 8 अगस्त 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 23 अगस्त 2026 (रविवार) | शुक्ल |
परिवर्तिनी एकादशी | 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 4 नवंबर 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 20 दिसंबर 2026 (रविवार) | शुक्ल |