अजा एकादशी — 2026
📅 तिथि: 8 अगस्त 2026 (शनिवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: आर्द्रा
🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (श्रवण)
📆 सप्ताह/दिन: शनिवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Aug 07
Ends – 08:15 PM, Aug 08
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2026-08-09
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)

व्रत का महत्व
अजा एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
अजा एकादशी की कथा
अजा एकादशी का व्रत हर साल श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन उपवास रखने से भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस एकादशी का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि इसे मोक्ष, समृद्धि और सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है।
कथा
प्राचीन काल में एक राजा था, जिसका नाम ‘धर्मवर्धन’ था। वह धर्म का पालन करने वाला और सच्चा भक्त था। एक बार, उसने सुना कि अजा एकादशी का व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष प्राप्त होता है। राजा ने निश्चय किया कि वह इस एकादशी का व्रत रखेगा।
राजा ने इस दिन उपवास रखा और भगवान विष्णु की पूजा की। इस दौरान, उसने अपने सभी पापों का प्रायश्चित किया। राजा की पत्नी, रानी ने भी इस व्रत में उसका साथ दिया। दोनों ने मिलकर भगवान की आराधना की। व्रत के समापन पर, राजा ने देखा कि भगवान विष्णु ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
अजा एकादशी का व्रत रखने से भक्तों को अनेक आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं। इस दिन उपवास करने से मन की शुद्धि होती है और व्यक्ति के पापों का नाश होता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से समस्त इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति में धैर्य, संतोष और भक्ति का विकास होता है। अजा एकादशी का व्रत करने वाले भक्तों को स्वास्थ्य, धन, और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का फल अत्यधिक फलदायी होता है।
इस प्रकार, अजा एकादशी का व्रत न केवल भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन में सुख और शांति लाने का भी साधन है।
अजा एकादशी पूजा विधि
- पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
- दीपक और तेल
- फल और सूखे मेवे
- पंचामृत (दही, दूध, घी, शहद, चीनी)
- फूल (कमल या अन्य शुभ फूल)
- कुमकुम और चंदन
- नैवेद्य (साबूदाना या फलाहार)
- गंगा जल या शुद्ध जल
- पूजा की प्रक्रिया:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें और वहां एक कपड़ा बिछाएं।
- दीपक जलाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें।
- पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें और फिर उन्हें स्नान कराएं।
- फूलों से श्रृंगार करें और कुमकुम व चंदन से तिलक करें।
- नैवेद्य अर्पित करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- आरती करें और ‘जय श्री कृष्णा’ का जाप करें।
- पराना (ब्रेकफास्ट) निर्देश:
- एकादशी व्रत के अगले दिन सुबह सूर्योदय से पहले उपवास तोड़ें।
- साबूदाना खिचड़ी या फल खाकर ब्रेकफास्ट करें।
- दूध या दही से बने खाद्य पदार्थ भी ग्रहण कर सकते हैं।
इस प्रकार, अजा एकादशी की पूजा विधि को सरलता से किया जा सकता है। भगवान विष्णु की कृपा से आपके सभी दुख दूर होंगे।
2026 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
सफल एकादशी | 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
सफल एकादशी | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 28 जनवरी 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 14 मार्च 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 28 मार्च 2026 (शनिवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 12 मई 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 26 मई 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 11 जून 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 25 जून 2026 (गुरुवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 8 अगस्त 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 23 अगस्त 2026 (रविवार) | शुक्ल |
परिवर्तिनी एकादशी | 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 4 नवंबर 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 20 दिसंबर 2026 (रविवार) | शुक्ल |