निर्जला एकादशी 2026 – तारीख, पूजा विधि, व्रत कथा

निर्जला एकादशी — 2026

📅 तिथि: 26 मई 2026 (मंगलवार)

📜 तिथि विवरण: एकादशी

🌌 नक्षत्र: स्वाती

🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (ज्येष्ठा)

📆 सप्ताह/दिन: मंगलवार

🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, May 25
Ends – 08:15 PM, May 26

परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)

📅 परना तिथि: 2026-05-27

🌞 सूर्योदय: 06:00 AM

🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (शुक्ल)

निर्जला एकादशी

व्रत का महत्व

निर्जला एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।

निर्जला एकादशी की कथा

निर्जला एकादशी, जिसे ‘भीष्म एकादशी’ भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस दिन उपवास रखने का विशेष महत्व है। इस व्रत का पालन करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके सभी पाप धो जाते हैं।

कथा का सार

एक बार, धर्मराज युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा कि निर्जला एकादशी का व्रत किस प्रकार किया जाना चाहिए और इसके क्या लाभ हैं। भीष्म पितामह ने बताया कि इस दिन उपवास करने से सभी प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं और भक्त को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति इस दिन निर्जल रहकर व्रत करता है, उसे सभी पवित्रता की प्राप्ति होती है।

भीष्म पितामह ने यह भी बताया कि एक बार एक ब्राह्मण ने इस व्रत का पालन किया था, लेकिन वह पानी का एक बूँद भी नहीं पी सका। इसके फलस्वरूप उसे स्वर्ग की प्राप्ति हुई। इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि निर्जला एकादशी का व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

महत्त्व और आध्यात्मिक लाभ

निर्जला एकादशी का व्रत श्रद्धालुओं को आत्मिक शुद्धता, संयम और तप का अनुभव कराता है। यह व्रत मन, आत्मा और शरीर को शुद्ध करता है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे मन से करता है, उसे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

अतः, निर्जला एकादशी का व्रत केवल शारीरिक उपवास का नहीं, बल्कि आत्मिक विकास का भी माध्यम है। इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए।

निर्जला एकादशी पूजा विधि

  • पूजा सामग्री:
      <li* चावल (अक्षत)
    • फूल
    • दीपक
    • अगरबत्ती
    • फल (जैसे केला, सेब)
    • पानी
    • नैवेद्य (सिंघाड़े का आटा/सुपारी)
    • गंगाजल
  • स्नान: प्रातः जल्दी स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थान सजाना: पूजा स्थान को स्वच्छ करें और वहाँ सूती कपड़ा बिछाएँ।
  • दीप एवं अगरबत्ती जलाना: दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।
  • गंगाजल छिड़कना: पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़कें।
  • भगवान विष्णु की पूजा: भगवान विष्णु का ध्यान करें और उन्हें चंदन, फूल, और फल अर्पित करें।
  • मंत्र जप:
    • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    • ॐ विष्णवे नमः
  • नैवेद्य अर्पण: नैवेद्य (सिंघाड़े का आटा या सुपारी) अर्पित करें।
  • आरती: भगवान की आरती करें और श्रद्धा पूर्वक आरती का भोग लगाएँ।
  • पाराण: एकादशी के दूसरे दिन प्रातः उपवास तोड़ते समय केवल फल और सूखे मेवे लें।

निर्जला एकादशी का उपवास विशेष महत्व रखता है। इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहें और अपने पापों का प्रायश्चित करें।

2026 की सभी एकादशियाँ

नाम तिथि पक्ष
सफल एकादशी 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) कृष्ण
सफल एकादशी 14 जनवरी 2026 (बुधवार) कृष्ण
षट्तिला एकादशी 28 जनवरी 2026 (बुधवार) शुक्ल
कात्यायनी एकादशी 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) कृष्ण
आमलकी एकादशी 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
विजया एकादशी 14 मार्च 2026 (शनिवार) कृष्ण
कामदा एकादशी 28 मार्च 2026 (शनिवार) शुक्ल
पापमोचनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) कृष्ण
मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) शुक्ल
अपरा एकादशी 12 मई 2026 (मंगलवार) कृष्ण
निर्जला एकादशी 26 मई 2026 (मंगलवार) शुक्ल
योगिनी एकादशी 11 जून 2026 (गुरुवार) कृष्ण
देवशयनी एकादशी 25 जून 2026 (गुरुवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
अजा एकादशी 8 अगस्त 2026 (शनिवार) कृष्ण
परिवर्तिनी एकादशी 23 अगस्त 2026 (रविवार) शुक्ल
परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) शुक्ल
पसांकुशा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) कृष्ण
पापांकुशा एकादशी 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) शुक्ल
रमा एकादशी 4 नवंबर 2026 (बुधवार) कृष्ण
प्रबोधिनी एकादशी 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 (रविवार) शुक्ल