पसांकुशा एकादशी 2026 – तारीख, पूजा विधि, व्रत कथा

पसांकुशा एकादशी — 2026

📅 तिथि: 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)

📜 तिथि विवरण: एकादशी

🌌 नक्षत्र: पूर्व फाल्गुनी

🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (Ashwin)

📆 सप्ताह/दिन: मंगलवार

🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Oct 05
Ends – 08:15 PM, Oct 06

परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)

📅 परना तिथि: 2026-10-07

🌞 सूर्योदय: 06:00 AM

🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)

पसांकुशा एकादशी

व्रत का महत्व

पसांकुशा एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।

पसांकुशा एकादशी की कथा

पसांकुशा एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री विष्णु की पूजा की जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कथा

एक समय की बात है, एक राजा था जिसका नाम ‘धर्मवीर’ था। वह अपने न्याय और धर्म के लिए प्रसिद्ध था। एक बार राजा ने एक साधु को अपने राजमहल में आमंत्रित किया। साधु ने राजा से कहा कि ‘आपको पासांकुशा एकादशी का व्रत करना चाहिए। इससे आपके राज्य में सुख-शांति एवं समृद्धि आएगी।’

राजा ने साधु की बात मानी और एकादशी का व्रत करने का निश्चय किया। उसने पूरे श्रद्धा भाव से इस दिन उपवास रखा और भगवान विष्णु की आराधना की। व्रत के प्रभाव से राजा का राज्य समृद्ध हुआ और सभी प्रजा में खुशी का माहौल बना। राजा ने व्रत के फल को देखकर सभी लोगों को इस पवित्र दिन का महत्व बताया और उन्होंने भी एकादशी का पालन करना शुरू किया।

महत्व और लाभ

पसांकुशा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, स्वास्थ्य और धन की प्राप्ति होती है। यह व्रत पापों का नाश करने वाला माना जाता है और इसे करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन श्री विष्णु की आराधना करने से भक्तों की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

इस प्रकार, इस एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का भी साधन है।

पसांकुशा एकादशी पूजा विधि

पसांकुशा एकादशी का व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु के प्रति समर्पित होता है। इस दिन उपवास रखकर भगवान की पूजा करने से विशेष लाभ होता है। यहां पूजा विधि प्रस्तुत की गई है:

  • पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
    • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
    • फूल (गुलाब, चमेली)
    • दीपक और बाती
    • अगरबत्ती
    • फल (केला, सेब)
    • पान और सुपारी
    • साफ कपड़ा
    • नैवेद्य (भोग)
  • पूजा की प्रक्रिया:
    • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
    • पूजा स्थान को साफ करें और वहां एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र रखें।
    • चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर पंचामृत चढ़ाएं।
    • फूलों से श्रृंगार करें और दीपक जलाएं।
    • अगरबत्ती जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें।
    • मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करें।
    • भोग का नैवेद्य अर्पित करें और प्रार्थना करें।
    • आरती करें और “धन्य धन्य” का गान करें।
  • पराण / ब्रेकफास्ट:
    • एकादशी के दिन उपवास रखें और अगले दिन प्रातः सूर्योदय के समय व्रत का पारण करें।
    • पारण के बाद फल-फूल और हल्का भोजन लें, जैसे कि चावल और दाल।

इस प्रकार, पसांकुशा एकादशी का व्रत श्रद्धा और भक्ति के साथ करें।

2026 की सभी एकादशियाँ

नाम तिथि पक्ष
सफल एकादशी 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) कृष्ण
सफल एकादशी 14 जनवरी 2026 (बुधवार) कृष्ण
षट्तिला एकादशी 28 जनवरी 2026 (बुधवार) शुक्ल
कात्यायनी एकादशी 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) कृष्ण
आमलकी एकादशी 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
विजया एकादशी 14 मार्च 2026 (शनिवार) कृष्ण
कामदा एकादशी 28 मार्च 2026 (शनिवार) शुक्ल
पापमोचनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) कृष्ण
मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) शुक्ल
अपरा एकादशी 12 मई 2026 (मंगलवार) कृष्ण
निर्जला एकादशी 26 मई 2026 (मंगलवार) शुक्ल
योगिनी एकादशी 11 जून 2026 (गुरुवार) कृष्ण
देवशयनी एकादशी 25 जून 2026 (गुरुवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
अजा एकादशी 8 अगस्त 2026 (शनिवार) कृष्ण
परिवर्तिनी एकादशी 23 अगस्त 2026 (रविवार) शुक्ल
परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) शुक्ल
पसांकुशा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) कृष्ण
पापांकुशा एकादशी 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) शुक्ल
रमा एकादशी 4 नवंबर 2026 (बुधवार) कृष्ण
प्रबोधिनी एकादशी 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 (रविवार) शुक्ल