प्रबोधिनी एकादशी — 2026
📅 तिथि: 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार)
📜 तिथि विवरण: एकादशी
🌌 नक्षत्र: अश्विनी
🌓 पक्ष/माह: शुक्ल (Kartika)
📆 सप्ताह/दिन: शुक्रवार
🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Nov 19
Ends – 08:15 PM, Nov 20
परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)
📅 परना तिथि: 2026-11-21
🌞 सूर्योदय: 06:00 AM
🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (शुक्ल)

व्रत का महत्व
प्रबोधिनी एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।
प्रबोधिनी एकादशी की महिमा
प्रबोधिनी एकादशी, जिसे देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है, कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु के जागरण का दिन है और इसे विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को अनेक लाभ और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं।
कथा
एक बार, एक राजा नामक धर्मराज ने प्रबोधिनी एकादशी का व्रत रखा। वह भगवान विष्णु की भक्ति में लीन होकर इस दिन उपवास करने का निर्णय लिया। राजा ने अपने राज्य में सभी को इस व्रत के महत्व के बारे में बताया और सभी प्रजा को भी इस व्रत को करने के लिए प्रोत्साहित किया।
राजा ने पूरे दिन केवल फल-फूल खाकर बिताया और रात को भगवान विष्णु की आरती कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयास किया। भगवान विष्णु ने राजा की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और कहा, “हे राजा, तुम्हारी भक्ति के कारण मैं तुम्हें समस्त सुखों का आशीर्वाद देता हूँ।” इस प्रकार, राजा की भक्ति से न केवल उन्हें, बल्कि उनके पूरे राज्य को सुख-समृद्धि प्राप्त हुई।
महत्व और आध्यात्मिक लाभ
प्रबोधिनी एकादशी का व्रत करने से भक्तों को मानसिक शांति, सुख, और समृद्धि मिलती है। यह दिन विशेष रूप से ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। इस व्रत से मोक्ष की प्राप्ति का भी मार्ग प्रशस्त होता है।
इस प्रकार, प्रबोधिनी एकादशी का व्रत करना न केवल भक्तों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह उन्हें भगवान के निकट भी ले जाता है। इस दिन की विशेष पूजा से जीवन में नए उत्साह और ऊर्जा का संचार होता है।
प्रबोधिनी एकादशी पूजा विधि
- पूजा के लिए आवश्यक सामग्री:
- दीपक
- अगरबत्ती
- फूल (कमल, गुलाब)
- फल (केला, सेब)
- निवेद्य (साबूदाना, खीर)
- पानी
- चंदन का पेस्ट
- कच्चा दूध
- सवेरे जल्दी उठें और स्नान करें।
- घर के पूजागृह को साफ करें और वहां एक आसन बिछाएं।
- दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं।
- भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- फूलों से भगवान का पूजन करें।
- निवेद्य (साबूदाना, खीर) का भोग अर्पित करें।
- इस अवसर पर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।
- भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में ज्ञान और प्रकाश आए।
- दोपहर में उपवास का पारण करें। उपवास के बाद फल और दूध का सेवन करें।
प्रबोधिनी एकादशी का उपवास बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा करने से समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
2026 की सभी एकादशियाँ
नाम | तिथि | पक्ष |
---|---|---|
सफल एकादशी | 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
सफल एकादशी | 14 जनवरी 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
षट्तिला एकादशी | 28 जनवरी 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
कात्यायनी एकादशी | 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
आमलकी एकादशी | 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
विजया एकादशी | 14 मार्च 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
कामदा एकादशी | 28 मार्च 2026 (शनिवार) | शुक्ल |
पापमोचनी एकादशी | 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) | कृष्ण |
मोहिनी एकादशी | 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) | शुक्ल |
अपरा एकादशी | 12 मई 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
निर्जला एकादशी | 26 मई 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
योगिनी एकादशी | 11 जून 2026 (गुरुवार) | कृष्ण |
देवशयनी एकादशी | 25 जून 2026 (गुरुवार) | शुक्ल |
कामिका एकादशी | 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
पुत्रदा एकादशी | 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
अजा एकादशी | 8 अगस्त 2026 (शनिवार) | कृष्ण |
परिवर्तिनी एकादशी | 23 अगस्त 2026 (रविवार) | शुक्ल |
परिवर्तिनी एकादशी | 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) | शुक्ल |
पसांकुशा एकादशी | 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) | कृष्ण |
पापांकुशा एकादशी | 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) | शुक्ल |
रमा एकादशी | 4 नवंबर 2026 (बुधवार) | कृष्ण |
प्रबोधिनी एकादशी | 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) | शुक्ल |
उत्पन्ना एकादशी | 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) | कृष्ण |
मोक्षदा एकादशी | 20 दिसंबर 2026 (रविवार) | शुक्ल |