रमा एकादशी 2026 – तारीख, पूजा विधि, व्रत कथा

रमा एकादशी — 2026

📅 तिथि: 4 नवंबर 2026 (बुधवार)

📜 तिथि विवरण: एकादशी

🌌 नक्षत्र: हस्ता

🌓 पक्ष/माह: कृष्ण (Kartika)

📆 सप्ताह/दिन: बुधवार

🕒 आरंभ/समाप्त समय: Begins – 09:26 PM, Nov 03
Ends – 08:15 PM, Nov 04

परना (व्रत तोड़ने की जानकारी)

📅 परना तिथि: 2026-11-05

🌞 सूर्योदय: 06:00 AM

🧘 परना के बाद तिथि: द्वादशी (कृष्ण)

रमा एकादशी

व्रत का महत्व

रमा एकादशी व्रत श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है।

रमा एकादशी की कथा

रमा एकादशी, जिसे ‘रमा एकादशी’ कहा जाता है, विशेष रूप से भगवान विष्णु की उपासना के लिए मनाई जाती है। यह एकादशी कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। इसे ‘दीपावली के बाद’ मनाने का महत्व है और इस दिन विशेष रूप से उपवास रखने का विधान है।

कथा का सार

एक समय की बात है, एक राजा अपने राज्य में बहुत दुखी था क्योंकि उसकी पत्नी संतान सुख से वंचित थी। राजा ने अपने राज्य के ऋषियों और साधुओं से सलाह ली। उन्होंने राजा को बताया कि रमा एकादशी का उपवास करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्त को संतान सुख की प्राप्ति होती है। राजा ने रमा एकादशी का व्रत किया और पूरे मन से भगवान की पूजा की।

राजा ने प्राणों से व्रत का पालन किया और भगवान विष्णु की आराधना की। व्रत के बाद, राजा की पत्नी ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। राजा और रानी ने भगवान विष्णु का आभार व्यक्त किया और यह निर्णय लिया कि वे हर वर्ष रमा एकादशी का व्रत श्रद्धा से मनाएंगे।

महत्व और आत्मिक लाभ

रमा एकादशी का व्रत केवल संतान सुख के लिए ही नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस दिन उपवास रखने से मन और शरीर की शुद्धि होती है। भक्तों को इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति करने और भजन-कीर्तन करने का विशेष अवसर मिलता है।

इस दिन का व्रत रखने से भक्तों को अनेक लाभ मिलते हैं, जैसे कि जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति। इसके साथ ही, यह व्रत परिवार में प्रेम और एकता को भी बढ़ाता है। जो लोग इस दिन व्रत करते हैं, उन्हें भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके सभी कष्ट दूर होते हैं।

इस प्रकार, रमा एकादशी का व्रत एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो भक्तों को आत्मिक और भौतिक सुख प्रदान करता है।

रमा एकादशी पूजा विधि

  • सामग्री इकट्ठा करें:
    • साफ जल
    • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और चीनी)
    • फूल (कमल, गुलाब)
    • फलों का भोग (केला, सेब)
    • दीपक और बत्ती
    • अगरबत्ती
    • कर्पूर
    • नवग्रह या भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र
  • स्नान करें: पूजा से पूर्व स्नान करना अनिवार्य है।
  • सजावट करें: पूजा स्थान को स्वच्छ करें और सजाएं।
  • दीपक जलाएं: भगवान के समक्ष दीपक जलाएं।
  • नवग्रह पूजन: नवग्रह या भगवान विष्णु का पूजन करें।
    • मंत्र: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  • फूल चढ़ाएं: भगवान को फूल अर्पित करें।
  • भोग अर्पित करें: फलों का भोग भगवान को अर्पित करें।
  • आरती करें: दीप जलाकर आरती करें।
    • मंत्र: “जय देव, जय देव, जय देव, जय देव”
  • प्रसाद वितरण: पूजा के बाद प्रसाद सभी भक्तों में बांटें।
  • पाराण (ब्रेकफास्ट) का समय: एकादशी का व्रत समाप्त करने के लिए द्वादशी तिथि को सुबह स्नान करें और फिर फलाहार करें।
    • दूध, फल, और साबूदाना का सेवन करें।

यह पूजा विधि श्रद्धा और भक्ति के साथ करें। रमा एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

2026 की सभी एकादशियाँ

नाम तिथि पक्ष
सफल एकादशी 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) कृष्ण
सफल एकादशी 14 जनवरी 2026 (बुधवार) कृष्ण
षट्तिला एकादशी 28 जनवरी 2026 (बुधवार) शुक्ल
कात्यायनी एकादशी 12 फ़रवरी 2026 (गुरुवार) कृष्ण
आमलकी एकादशी 27 फ़रवरी 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
विजया एकादशी 14 मार्च 2026 (शनिवार) कृष्ण
कामदा एकादशी 28 मार्च 2026 (शनिवार) शुक्ल
पापमोचनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 (सोमवार) कृष्ण
मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) शुक्ल
अपरा एकादशी 12 मई 2026 (मंगलवार) कृष्ण
निर्जला एकादशी 26 मई 2026 (मंगलवार) शुक्ल
योगिनी एकादशी 11 जून 2026 (गुरुवार) कृष्ण
देवशयनी एकादशी 25 जून 2026 (गुरुवार) शुक्ल
कामिका एकादशी 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
पुत्रदा एकादशी 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
अजा एकादशी 8 अगस्त 2026 (शनिवार) कृष्ण
परिवर्तिनी एकादशी 23 अगस्त 2026 (रविवार) शुक्ल
परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 (मंगलवार) शुक्ल
पसांकुशा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) कृष्ण
पापांकुशा एकादशी 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार) शुक्ल
रमा एकादशी 4 नवंबर 2026 (बुधवार) कृष्ण
प्रबोधिनी एकादशी 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) शुक्ल
उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) कृष्ण
मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 (रविवार) शुक्ल